Brahmos Missile Deal: रक्षा क्षेत्र में हथियारों के निर्यात में भारत ने बड़ा कदम उठाया है. भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, ब्रह्मोस के निर्यात के लिए फिलीपींस से करार किया है. दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के चीन से चल रहे तनाव के बीच भारत के ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात एक बड़ी सामरिक साझेदारी मानी जा रही है. भारत ने फिलीपींस को समंदर-तट से लॉन्च की जाने वाली एंटी-शिप ब्रह्मोस मिसाइल देने के लिए करार किया है.

शुक्रवार को फिलीपींस की राजधानी, मनीला में भारत और फिलीपींस के बीच ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात के लिए करार हुआ. भारत की तरफ से मनीला स्थित राजदूत शंभु कुमारन ने हस्ताक्षर किए तो फिलीपींस की तरफ से रक्षा सचिव (भारत के रक्षा मंत्री समकक्ष), डेलफिन लोरेंजाना ने करार किया. कोविड प्रोटोकॉल के चलते ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राईवेट लिमिटेड के सीईओ सहित बड़े अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से इस हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए.

फिलीपींस के साथ हुआ बड़ा रक्षा समझौता

फिलीपींस के साथ हुई इस डील के बाद भारत के रक्षा मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान जारी करते हुए कहा कि भारत सरकार की ‘जिम्मेदार’ रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने की नीति के लिए ये करार एक महत्वपूर्ण कदम है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 28 जनवरी (शुक्रवार) को ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राईवेट लिमिटेड (बीएपीएल) ने एंटी शिप मिसाइल के लिए फिलीपींस के डिपार्टमेंट ऑफ नेशनल डिफेंस से समझौता किया. बीएपीएल कंपनी डीआरडीओ यानि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गेनाईजेशन का रूस के साथ एक संयुक्त उद्यम है.

हालांकि, रक्षा मंत्रालय या फिर फिलीपींस की तरफ से सौदे की कीमत को लेकर आधिकारिक तौर से कोई जानकारी नहीं दी गई लेकिन माना जा रहा है कि पूरी डील 2777 करोड़ की है (करीब 37.50 करोड़ डॉलर). अभी ये साफ नहीं है कि ब्रह्मोस की कितनी बैटरी (यूनिट), लॉन्चर और मिसाइल फिलीपींस को दी जानी है.

रूस की हरी झंडी देने के बाद सफल हुआ करार

रूस की मदद से तैयार की गई, ब्रह्मोस को भारत ने ‘प्राइम स्ट्राइक वैपन’ घोषित किया है. ब्रह्मोस, भारत की थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों के ही जंगी बेड़े का हिस्सा है. चीन से चल रही तनातनी के बीच भारतीय सेना ने एलएसी पर ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती पूर्वी लद्दाख से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक कर रखी है. साथ ही ब्रह्मोस मिसाइल से लैस सुखोई लड़ाकू विमान भी एलएसी के करीब एयर-बेस पर तैनात कर रखे हैं.  

आपको बता दें कि फिलीपींस दूसरा ऐसा देश है जो ब्रह्मोस को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है. इससे पहले कई साल तक वियतनाम ने भी इच्छा जताई थी लेकिन किन्ही कारणों से सौदा नहीं हो पाया था. हाल ही में भारत में रूस के एक राजनयिक ने भी कहा था कि ब्रह्मोस को फिलीपींस को बेचने में रूस को कोई ऐतराज नहीं है. रूस के हरी झंडी देने के बाद ही ये करार संभव हो पाया है. 

सालों पहले से ब्रह्मोस चाहता है फिलीपींस

फिलीपींस कई सालों से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने का इच्छुक था लेकिन इसके लिए फंड जुटाना मुश्किल हो रहा था. वर्ष 2020 में फिलीपींस के रक्षा सचिव ने ब्रह्मोस के लिए फंड जुटाना एक बड़ी चुनौती बताया था. हालांकि, उस वक्त उन्होंने ये भी कहा था कि भारत से ब्रह्मोस मिसाइल लेने का प्रोग्राम सही दिशा में चल रहा है.

फिलीपींस के बजट-विभाग ने पिछले साल के अंत में अपनी देश की नौसेना के लिए दो स्पेशल एलोटमैंट रिलीज ऑर्डर यानि खास फंड सुनिश्चित किए थे. इनमें से एक 1.3 बिलियन पेसोस (फिलीपींस की मुद्रा) और एक 1.5 बिलियन पेसोस का था. दोनों ही फंड फिलीपींस की नौसेना के मिसाइल सिस्टम की शुरूआती फंडिंग के लिए थे. उसी वक्त ये कयास लगने शुरू हो गए थे कि अब भारत और फिलीपींस में ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर समझौता जल्द हो सकता है. एबीपी न्यूज़ ने 14 जनवरी को ही बता दिया था कि जनवरी के महीने में दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस को लेकर समझौता हो जाएगा.

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भारत का अगर चीन के साथ एलएसी पर विवाद है तो फिलीपींस का साउथ चायना सी में चीन के साथ लंबा विवाद रहा है. ऐसे में फिलीपींस के भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने से दोनों देशों के बीच सामरिक-साझेदारी हो गई है. हाल ही में नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) में भारत ने फिलीपींस और दूसरे मित्र-देशों के सैन्य-अधिकारियों के लिए अतिरिक्त सीटें भी रिजर्व की थीं.

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