महाराष्ट्र साधू संतो की भूमी माना जाता है और कोई हजारो साल पहले से मंदिर ओके पुजारी संत महंत ही दुवा करते थे और आजही व परंपरा चालू आहे महाशिवरात्री शिवजी की महापूजा महाभिषेक किया जाता है भारत के पूरे आखाडा के साधू महंत से ही सुरुवात होती है लेकिन सिर्फ और सिर्फ महाराष्ट्र मे मंदिरो मे साधू संतो कोई प्रवेश ना करा जाता है ही बहुत ही निंदणी बात है इस सिलसिले में महाराष्ट्र के नाशिक जिले के त्र्यंबकेश्वर के तेरे आखो के साथ है जिल्हा अधिकारी तथा प्रशासन को की अपनी प्रवेश करने की किमान आप भी ज्यादा देंगे तुम्ही प्रवेश करेंगे नही जो भी देखे तो भी प्रवेश करेंगे ऐसा हट्टा साधू ने किया है अभी देखते है
महाराष्ट्र प्रशासन क्या करता है भारत वर्ष तीन चीज को कभी ना कर नही जाता है एक श्री हाट जोग हाट और बाल हट हे तिन्ही हाट भगवान शिवशंकर से तो ब्रम्हा तक हाकारा नही जाता है हे बाद शाळेत महाराष्ट्र के सीएम भूल चुके है लेकिन बाळासाहेब ठाकरे ही चीज को भी नही बोलते ते पैसा साधू म्हणतो नही अपनी प्रतिक्रिया देते है कहा है और प्रशासन की बहुत ही निंदा किया है हमारा हक हमारे जिंदगी किसी के लिये हमे प्रशासन के तरफ भीक मागणं आहे बहुत परम नाकी बाबा है ऐसा ही आपणा संतप्त होऊन दिया है त्रंबकेश्वर मे पाच बजे से तो आठ बजे तक पुरे आखाडा के साधू संत और महांत सुबह पूजा करेंगे खुशी के बाद हम पुजारी से तो आम आदमी हे परंपरा पुरे करेंगे ऐसा नो ने एलान किया है

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