जालौन के उच्च प्राथमिक विद्यालय की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें दिख रहा है कि छात्र के हाथ में भोजन की थाली है। थाली पूरी, पनीर की सब्जी, फल, आइसक्रीम कई अलग-अलग तरह के व्यंजनों से भरी पड़ी है। दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार में मध्याह्न भोजन योजना यानी मिड डे मील के तहत सरकारी विद्यालयों में ऐसी भोजन की थाली परोसी जा रही है।

जब इसकी पड़ताल असली न्यूज़ टीम ने की तो पाया वायरल दावा भ्रामक है। वायरल हो रही तस्वीर जालौन जिले के मलकपुरा ग्राम पंचायत की है और इस पंचायत के ग्राम प्रधान (सरपंच) की पहल से महीने में कुछ दिन ऐसी थाली बच्चों को परोसी जाती है। यह नियमित मध्याह्न भोजन की थाली नहीं है, बल्कि लोगों के सहयोग से महीने में दो से चार बार ऐसी थाली बच्चों को परोसी जाती है।

15 अगस्त 1995 से देश में मध्याह्न भोजन योजना लागू की गई थी, जिसमें शुरुआती दिनों में विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गेहूं और चावल देने की व्यवस्था की गई थी। ऐसा होने की वजह से खाद्यान्न छात्रों को न मिलकर उनके परिवार में बंट जाता था और उन्हें पोषण नहीं मिल पाता था। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, एक सितंबर 2004 से विद्यालयों में पके हुए भोजन को उपलब्ध कराए जाने की योजना की शुरुआत की गई।

बता दें कि हमने सर्च को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट upmdm.org पर मिड डे मील योजना की साप्ताहिक मेन्यू के बारे में जानकारी दी गई है और इसके तहत सोमवार से शनिवार के बीच परोसे जाने वाले व्यंजनों की सूची वायरल हो रही तस्वीर की सूची से मेल नहीं खाती है।

अतः हमारी पड़ताल में स्पष्ट हो गया कि खाने की जो थाली नजर आ रही है, वह उत्तर प्रदेश में मध्याह्न भोजन योजना के तहत परोसे जाने वाली नियमित थाली नहीं है। न्यूज सर्च में हमें कुछ आर्टिकल के लिंक मिले, जिसमें वायरल तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जालौन के मलकपुरा उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को मिड डे मील मेन्यू के अलावा छात्रों को पनीर, पूड़ी, सब्जी, छोले, रसगुल्ले, मिठाई, खीर, आइसक्रीम और फल जैसी तमाम सारी चीजें थाली में परोसी जाती हैं। स्कूल में बच्चों की थाली में भोजन की फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। वहीं, लोग स्कूल प्रबंधन के साथ ग्राम प्रधान की जमकर तारीफ कर रहे हैं।’

स्थानीय निवासी ने बताया कि जो तस्वीर वायरल हो रही है, उस भोजन का आयोजन सौरभ शुक्ला के सहयोग से हुआ, जो कानपुर में केनरा बैंक की एक शाखा में प्रबंधक के पद पर तैनात हैं। सहयोग राशि से ही यह आयोजन संभव हो पाता है।’ अमित ने बताया कि यह मध्याह्न भोजन का मेन्यू नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस तरह के पहल आस-पास के अन्य जिलों में भी हो रही है, तो अमित ने कहा- ‘यह पहल फिलहाल उन्हीं के पंचायत क्षेत्र के स्कूल में चल रही है।’

हमारी पड़ताल साफ़ हो गया कि उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के दौरान परोसे जाने वाले व्यंजनों की थाली के साथ वायरल हो रही तस्वीर भ्रामक है। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के मलकपुरा ग्राम पंचायत में वहां के प्रधान की तरफ से एक स्कूल में जन सहयोग की मदद से महीने में दो से चार बार भोजन की विशेष थाली का प्रबंध किया जाता है और इसी तस्वीर को यूपी के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के तहत मिलने वाले नियमित भोजन का बताकर शेयर किया जा रहा है।

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