Expectations From Union Budget 2022: कोरोना महामारी के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) आज संसद में बजट पेश करने जा रही हैं. ये बजट वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण का चौथा बजट होगा. कोरोना महामारी की तीसरी लहर के बीच पेश होने जा रहे बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं. किसान, व्यापारी से लेकर आम आदमी इस बजट के जरिए कुछ राहत की उम्मीद लगाए बैठा है. ये बजट पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आ रहा है. इस वजह से इसके लोकलुभावन होने की अधिक संभावना जताई जा रही है. कृषि, हेल्थ समेत कई सेक्टर से संबधित लोगों को बजट से काफी उम्मीदें हैं.

कृषि सेक्टर को उम्मीद

1 फरवरी 2022 को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किए जाने वाले बजट के लोकलुभावन होने की उम्मीद जताई जा रही है. किसानों के लिए इस बजट में कई बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं. किसानों को आशा है कि केंद्र की मोदी सरकार बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का सालाना पैसा 6 हजार से बढ़ाकर दोगुना कर सकती है. कृषि क्षेत्र (Farm Sector) में प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार बजट में कृषि कर्ज (Agriculture Loans) के लक्ष्य को बढ़ा सकती है. सरकार इसे बढ़ाकर 18 लाख करोड़ रुपये तक कर सकती है. पहली बार जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तो किसानों की आय दोगुना करने की बात कही गई थी. साल 2016 में इसे लेकर एक कमेटी भी बनी थी लेकिन किसानों की हालत अभी तक सुधर नहीं पायी है. बजट में किसानों की आय सुधारने से संबधित कुछ ऐलान किए जा सकते हैं.

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डिफेंस सेक्टर के लिए बजट में क्या है संभव

पीएम मोदी के कार्यकाल में देश का रक्षा बजट काफी बढ़ गया है. पिछले साल बजट में डिफेंस के लिए करीब 4.78 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. साल 2014 में भारत के रक्षा बजट को देखें तो यह करीब 2.29 लाख करोड़ के आसपास था. चीन के साथ तनाव के बीच रक्षा के मामले में भारत को अपनी स्थिति और सुधारने की जरूरत है. डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने की काफी जरूरत महसूस की जा रही है. रक्षा क्षेत्र में विकास के साथ हथियारों के आयात को कम करने की जरूरत है. अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए देश को और बजट बढ़ाना आवश्यक है. ऐसा माना जा कि इस बजट में डिफेंस सेक्टर को 5 लाख करोड़ से अधिक का आवंटन हो सकता है.

उद्योग और स्टार्टअप

कोरोना महामारी के बीच उद्योगों को काफी नुकसान पहुंचा है. व्यापारी इस बजट से काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं. वहीं युवा वर्ग स्टार्टअप के लिए कर्ज की प्रक्रिया के सरलीकरण की उम्मीद लगाए है. वहीं कर्ज रिकवरी सिस्टम को मजबूत किया जा सकता है. लघु उद्योगों को शुरू करने संबंधी स्कीम को लागू करने की आशा भी युवा लगा रहे हैं. नौकरी न मिलने से नाराज युवा वर्ग को रोजगार क्षेत्र में बेहतरीन व्यवस्था की उम्मीद है. वहीं उद्योगपति हर साल नए-नए टैक्स जुड़ जाने की वजह से भी कही न कहीं परेशान हैं. टैक्स में कटौती की उम्मीद भी बजट से लगाई जा रही है. विमानन क्षेत्र के लोग कम से कम 2 सालों के लिए कर छूट और न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स की उम्मीद कर रहे हैं 

रियल एस्टेट

कोरोना महामारी के बीच रियल सेक्टर भी काफी प्रभावित हुआ है. रॉ मैटेरियल भी काफी महंगा हुआ है, कुछ अहम छूट के साथ रॉ मैटेरियल पर जीएसटी में कटौती की पेशकश से रियल एस्टेट को राहत मिल सकती है. उधर RBI की स्टेबल मॉनेटरी नीति के कारण हाउसिंग लोन की दरें अब तक के सबसे नीचले लेबल पर है. ऐसे में इस उद्योग से जुड़े लोगों को सरकार से कुछ राहत की उम्मीदें है ताकि इससे जुड़े दूसरे उद्योंगों को भी फायदा पहुंच सके.

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हेल्थ सेक्टर

केंद्रीय बजट में हेल्थ सेक्टर को लेकर भी खास उम्मीदें जताई जा रही है. बजट में हेल्थ सेक्टर पर सरकार का खास जोर होने की उम्मीद है. फार्मा उद्योग को उम्मीद है कि इस बजट में हेल्थकेयर सेक्टर के लिए कुल फंड आवंटन में बढ़ोतरी की जा सकती है. घरेलू फार्मास्युटिकल्स कंपनियों का कहना है कि मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2022 से हेल्थ सर्विस क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाने, दवा पर शोध और विकास आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की आस है. साथ ही कई दवाओं पर टैक्स छूट जारी रखने की भी उम्मीद जताई जा रही है. व्यापार को और आसान बनाने के लिए प्रोसेस को सरल करने की मांग भी उठाई गई है. हेल्‍थ सेक्‍टर के बजट में सरकार 10 से 12 फीसदी तक की बढ़त्तरी कर सकती है.

ज्वैलरी उद्योग 

ज्वैलरी उद्योग और ज्वैलर्स को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं. इस उद्योग से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि सरकार बजट 2022 में इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) कम कर बड़ी राहत दे सकती है. इस उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद हॉलमार्क नियम लागू होने से बिक्री काफी प्रभावित हुई है. सोना, हीरा, चांदी की खरीद-बिक्री के लाभ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी जबकि शोर्ट टर्म 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने की मांग की जा रही है. 



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