केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में आम बजट पेश किया. उन्होंने कृषि, रेलवे समेत विभिन्न क्षेत्रों के लिए कई अहम ऐलान किए. आगामी वर्ष में कृषि क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार का ड्रोन के इस्तेमाल पर काफी फोकस रहने वाला है. इसके लिए एग्रीकल्चर में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि ड्रोन के इस्तेमाल से किसानों के समय की बचत होगी और लागत में भी कमी आएगी। इसके अलावा भी कई अन्य फायदे बताए जा रहे हैं। खेती में ड्रोन के इस्तेमाल के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कुछ दिन पहले स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी जारी किया था।

फिलहाल बाजार में मौजूद ड्रोन्स बेहद महंगे हैं। इसके चलते अभी इन्हें खरीद पाना सभी किसानों के लिए संभव नहीं है। करीब 10 लीटर क्षमता वाले ड्रोन की कीमत 6-10 लाख रुपए के बीच है। हालांकि, बाजार में ऐसी कई कंपनियां आ गई हैं, जो एग्री ड्रोन सर्विस प्रोवाइड करती है यानी अगर आप अपने खेत में कीटनाशकों का छिड़काव कराना चाहते हैं या फसल की मॉनिटरिंग कराना चाहते हैं तो बस एक फोन कॉल पर ये कंपनियां प्रति एकड़ के हिसाब से आपके लिए ये काम कर देंगी।

जनसंख्या के लिहाज से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है और क्षेत्रफल के हिसाब से सातवां बड़ा देश। ऐसे में इतनी बड़ी आबादी को अन्न सुरक्षा देना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसलिए जरूरी है कि पारंपरिक खेती की बजाय आधुनिक और तकनीकी खेती का विस्तार हो। खेती की बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी किसानों को खेती से नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में ड्रोन जैसी टेक्नोलॉजी के जरिए की गई प्रिसिजन फार्मिंग देश के किसानों को बेहतर विकल्प दे सकती है। ड्रोन का इस्तेमाल कर किसान लागत में कमी और समय की बचत कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। पारंपरिक तरीके से कीटनाशकों का छिड़काव करने से किसान की हेल्थ पर भी इसका इफेक्ट पड़ता है, लेकिन ड्रोन के इस्तेमाल से इससे बचा जा सकता है।

फरवरी 2021 के बजट पर किसानों की खास नजर थी, क्योंकि उस वक्त किसान कानून के खिलाफ करीब दो महीने से तमाम किसान प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, तब किसानों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली था, सिवाय आश्वासन के। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की थी कि 2021-22 में किसानों को अधिक कृषि ऋण उपलब्‍ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। फरवरी 2020 में 15 लाख करोड़ रुपये की घोषणा हुई थी, जिसे फरवरी 2021 में मामूली बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। साथ ही कृषि उत्पादों के एक्सपोर्ट में 22 और उत्पादों को शामिल करने की घोषणा हुई थी।

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