मंगलवार को सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके ओडिशा पहुंचे। जहाँ उन्होंने पुरी में जगन्नाथ मंदिर का दौरा किया और एनजीओ वीर सावरकर फाउंडेशन द्वारा कटक में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया।

इसी बीच ओडिशा पुलिस के एक सूत्र ने सुरेश चव्हाणके पर हमले की आशंका जताई। जिसके बाद ओडिशा पुलिस ने उत्तर प्रदेश में अपने समकक्षों के अनुरोध पर कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए हैं कि सुदर्शन के टीवी संपादक सुरेश चावनके द्वारा राज्य की दो दिवसीय यात्रा “परेशानी-मुक्त” है।

भुवनेश्वर में यात्रा के बाद आज बुधवार को उनका केओनजहर जिला जेल में दारा सिंह से मिलने का कार्यक्रम था। बता दें कि दारा सिंह तीन अलग -अलग मामलों में सजा काट रहे हैं। जिनमें ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स की हत्याएं और 1999 में उनके दो बेटों की हत्याएं शामिल हैं।

दारा सिंह से जेल के प्रांगण में मिलने पहुंचे सुरेश चव्हाणके को दारा सिंह से मिलने से रोका गया। जिसके बाद वो स्थानीय विधायको के साथ धरना प्रदर्शन पर बैठ गए है। इस बात बात की जानकारी उन्होंने ट्विटर के माध्यम से दी। उन्होंने लिखा, “मुझे दारा सिंह जी को अनुमति के बाद भी मिलने नहीं दिया जा रहा हैं। इस लिए मैं केंदूझर जिला जेल के बाहर धरने पर बैठा हूँ। मेरे साथ कई स्थानीय नागरिक भी हैं। #JusticeForDaraSingh मैं उड़ीसा सरकार से न्याय की माँग करता हूँ।”

जिसके बाद जेल अंदर ही दारा सिंह भी सुरेश चव्हाणके से मिलने के लिए धरने पर बैठ गए है। एक अन्य ट्वीट कर के चव्हाणके ने इस बात की जानकारी दी।

बता दें कि सुरेश चव्हाणके दारा सिंह की रिहाई के लिए निरंतर अभियान चलते रहे है। 2017 में, चव्हाणके ने ट्विटर पर यह बताया कि दारा सिंह ने बिना किसी पैरोल के 18 साल जेल में बिताए थे, जबकि अखिल भारतीय द्रविड़ मुन्नेट्रा कज़गाम नेता वी.के. SASCIKALA – उस वर्ष फरवरी में एक असमान संपत्ति मामले में गिरफ्तार किया गया था – अपने पति से मिलने के लिए पांच दिनों के लिए पैरोल दिया गया था, जो सर्जरी के बाद ठीक हो रही थी।

जून 2018 में, सुरेश चव्हाणके ने ईद उल फितर के अवसर पर कश्मीर में 115 कैदियों की रिहाई का हवाला देते हुए सिंह के पक्ष में बहस करने के लिए फिर से ट्विटर पर लिया।

जून 2020 में सुदर्शन न्यूज में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए, चव्हाणके ने दारा सिंह के मामले की तुलना जामिया समन्वय समिति के मीडिया समन्वयक सफोरा ज़ार्गर से की, जिन्हें 2020 दिल्ली दंगों के मामले में मानवीय आधार पर जमानत दी गई थी।

सुरेश चव्हाणके “दारा सिंह को रिलीज़ करने के लिए अपनी आवाज उठाने वाली पहली आवाज है”। इससे पहले वो साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, सुधा चतुर्वेदी, स्वामी अमृतानंद के लिए सफलतापूर्वक अभियान चला चुके है।

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