घटना 2 अप्रैल 2022 की है, जहाँ राजस्थान के करौली के मुस्लिम बहुल इलाके में हिंदुओं के जुलूस पर हमले के बाद एक तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हुई थी। जिसमें एक पुलिस कॉन्स्टेबल आग की लपटों के बीच एक बच्ची को अपने सीने से लगाए दौड़ लगा रहे थे। उनके पीछे-पीछे एक महिला भी जान बचाते हुए भागती नजर आई थी। तस्वीर में नज़र आने वाले कॉन्स्टेबल का नाम नेत्रेश शर्मा है। हिंसा के बीच उन्होंने चार लोगों की जान बचाई थी।

बच्ची की माँ विनिता ने एक चैनल से बात करते हुए बताया, “वह अपनी बेटी पीहू, देवरानी वैशाली और उसकी भाभी बबीता के साथ बाजार में शॉपिंग करने गई थी। तभी सभी दुकानें बंद हो गई। थोड़ी देर बाद माहौल बिगड़ता देखकर वे पास के एक घर के अंदर जा रहे लोगों के साथ उस घर में चले गए। कुछ देर बाद ही दुकानों के शटर पर पत्थर फेंकने की आवाज आने लग गई। धीरे माहौल और बिगड़ गया। करीब 15 मिनट बाद आग की लपटें, चारों तरफ धुएँ के गुब्बार उठने लगे, जिससे घर के अंदर हमारा दम घुटने लगा। मैं भी अन्य लोगों की तरह घर की छत पर जाना चाहती थी, लेकिन अपनी सो रही बेटी को जगाना नहीं चाहती थी। मैं अपनी बेटी के बारे में सोच सोचकर बहुत डरी हुई थी। मैंने रोते हुए अपने पति हरिओम को फोन किया तो वे भी चिंता में पड़ गए और कहा कि मैं जल्द वहाँ आ रहा हूँ। लेकिन मैं पति की जान खतरे में नहीं डालना चाहती थी। इसलिए मैंने उन्हें अपनी लोकेशन नहीं भेजी। इसी दौरान माइक से आवाज आई कि कोई भी घरों में हो तो बाहर आ जाएँ।”

बच्ची की माँ ने आगे बताया, “पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह इंदोलिया अनाउसमेंट कर रहे थे। कुछ पुलिसकर्मी घरों में फँसे लोगों को निकाल रहे थे तो कुछ पुलिसकर्मी आग बुझा रहे थे। सभी जगह आग की लपटें उठ रही थी। तभी पुलिस अधीक्षक ने दो कॉन्स्टेबल को हमें वहाँ से निकालने के निर्देश दिए। एक कॉन्स्टेबल ने मेरी देवरानी और उसकी भाभी को वहाँ से सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं दूसरे कॉन्स्टेबल ने मेरी बेटी को सीने से लगाकर मुझे पीछे आने की कहकर हिंसा वाली जगह से निकालकर लाया। उन्होंने मेरी बेटी को आग वाले स्थान से लगभग 20 मीटर दूर ले जाकर उतारा। यह देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गए।” विनिता ने कहा कि जब तक पुलिस में ऐसे अधिकारी और जाबांज सिपाही हैं तब तक हम सुरक्षित हैं।

इससे पहले नेत्रेश शर्मा ने टाइम्स नाउ नवभारत को बताया था कि 2 अप्रैल को वह इलाका आग की लपटों से घिरा हुआ था। दो दुकानें जिसमें आग लगी हुई थी, उसी के बीच मौजूद एक घर से कुछ महिलाओं की चिल्लाने की आवाज आई। मैं उस ओर भागा तो वहाँ मैंने देखा कि एक महिला के पास मासूम बच्चा है, जिसे उन्होंने सीने से लगा रखा था और सुरक्षित जगह पर जाना चाहती थीं। शर्मा ने आगे बताया कि उसके बाद वे उन्होंने महिला की गोद से बच्ची को लिया और फिर उसे सीने से लगाकर तेजी से बाहर निकल गए। इस दौरान उन्होंने वहाँ मौजूद अन्य महिलाओं को भी अपने पीछे चलने के लिए कहा और फिर उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुँचाया।

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