RRB-NTPC Exam Result Case Protest: रेलवे भर्ती बोर्ड की गैर तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों (आरआरबी-एनटीपीसी) परीक्षा 2021 परिणाम के विरोध में जारी छात्रों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को बिहार के अन्य हिस्सों में फैल गया. प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को कई स्थानों पर रेल पटरियों पर धरना दिया जिससे राज्य में ट्रेनों की आवाजाही बाधित हुई. विरोध प्रदर्शन के कारण मंगलवार को कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया या वैकल्पिक मार्गों पर चलाया गया. छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के कारण पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) क्षेत्र से गुजरने वाली 25 से अधिक ट्रेनों के संचालन में बाधा उत्पन्न हुई जिससे यात्रियों को असुविधा हुई.

विरोध-प्रदर्शन की घटनाएं पटना, नवादा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बक्सर और भोजपुर जिलों से हुईं. कुछ जगहों पर गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया, सुरक्षा लों से भिड़ गए और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. सीतामढ़ी में रेलवे स्टेशन पर गुस्साए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवा में गोलियां चलायीं.

ईसीआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने मंगलवार को बताया कि पटना के राजेंद्र नगर स्टेशन से चलने वाली दुर्ग-राजेंद्र नगर दक्षिण बिहार एक्सप्रेस को प्रदर्शनकारियों के विरोध के कारण दिन के लिए रद्द करना पड़ा. इसके अलावा गया-जमलापुर पैसेंजर, गया-हावड़ा एक्सप्रेस और पटना-वाराणसी एक्सप्रेस ट्रेनें भी मंगलवार को रद्द कर दी गईं. उन्होंने कहा कि कई अन्य ट्रेनों के मार्ग बदलने पड़े.

आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा 2021 के परिणाम से नाराज छात्रों ने सोमवार को पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनस पर धरना दिया और रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था. इस बीच बढ़ते विरोध के बीच रेल मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर उम्मीदवारों को रेलवे की नौकरी पाने से जीवन भर के लिए प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी.

एनटीपीसी के विरोध के संबंध में रेल मंत्रालय के आधिकारिक नोटिस में उल्लेख किया गया है कि जो उम्मीदवार गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त पाए जाएंगे उन्हें रेलवे में नौकरी के लिए अनुपयुक्त माना जाएगा. इन गैरकानूनी गतिविधियों में रेलवे पटरियों पर विरोध प्रदर्शन, ट्रेन संचालन में व्यवधान, रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आदि शामिल हैं. वहीं, प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि 2019 में जारी आरआरबी अधिसूचना में केवल एक परीक्षा का उल्लेख किया गया था. उन्होंने अधिकारियों पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया.

परीक्षा परिणाम 15 जनवरी को घोषित होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा है. उस समय रेल मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण जारी किया था जिसमें कहा गया था कि अधिसूचना में दूसरे चरण की परीक्षा का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था. सीबीटी के पहले चरण की परीक्षा सभी उम्मीदवारों के लिए एक सामान्य परीक्षा थी.



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