पिछले वर्ष दिसंबर माह में देश की राजधानी दिल्ली में हिन्दू युवा वाहिनी द्वारा आयोजित धर्म संसद में सुदर्शन टीवी के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की हिन्दू राष्ट्र की शपथ को दोहराया गया था। जिसके बाद सुरेश चव्हाणके पर लिबरल वर्ग अर्बन नक्सल और इस्लामिस्ट जिहादियों ने हेट स्पीच का आरोप लगते हुए शिकायत दर्ज दी। लेकिन अब पुलिस ने शीर्ष अदालत के समक्ष आगे प्रस्तुत किया कि दिल्ली के गोविंदपुरी में हिंदू युवा वाहिनी कार्यक्रम में सुदर्शन टीवी के सुरेश चव्हाणके का भाषण अभद्र भाषा नहीं था क्योंकि चव्हाणके द्वारा भाषण में इस्तेमाल किए गए किसी भी शब्द में स्पष्ट रूप से भारतीय मुसलमानों को “हड़पने वाले” के रूप में वर्णित नहीं किया गया था।

हलफनामे में कहा गया है कि पुलिस ने घटना के खिलाफ शिकायतों की प्रारंभिक जांच की और दिए गए भाषणों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच की।”ऐसे शब्दों का कोई उपयोग नहीं है, जिनका मतलब है या भाषण में एक पूरे समुदाय की हत्या के लिए खुले आह्वान या जातीय सफाई प्राप्त करने के लिए मुसलमानों के नरसंहार के लिए खुले आह्वान के रूप में व्याख्या की जा सकती है।”

याचिका में कहा गया है कि 17 और 19 दिसंबर, 2021 के बीच दिल्ली में (हिंदू युवा वाहिनी द्वारा) और हरिद्वार (यति नरसिंहानंद द्वारा) में आयोजित दो अलग-अलग कार्यक्रमों में, नफरत फैलाने वाले भाषण दिए गए, जिसमें मुसलमानों के नरसंहार के लिए खुले आह्वान शामिल थे।

बता दें जब सुरेश चव्हाणके के विरुद्ध ये लिबरल वर्ग वामपंथी लोग ये अभियान चला रहे थे तो सुरेश चव्हाणके ने बार बार इस बात को दोहराया था कि ये शपथ मैं नहीं ले रहा हूँ ये शपथ हिंदवा साम्राज्य संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने ली थी और मैं उसी शपथ को दोहरा रहा हूं। छत्रपति शिवाजी महाराज की शपथ दोहराने में मुझे कोई समस्या नहीं है और मैं इस शपथ को बार बार दोहराऊंगा। इसके बाद लिबरल वर्ग ने सुरेश चव्हाणके जी के विरुद्ध मामला दर्ज कराया था, लेकिन अब इस मामले में सुदर्शन न्यूज़ और सुरेश चव्हाणके को विजय प्राप्त हुई है।

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