7 मई को मुस्कान एवं ओम आश्रम की ओर से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘अध्यात्म का एक महासमागम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजय वर्गीय रहे। साथ ही इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा, संत नरेन्द्रानाथ सरस्वती, हनुमान गढ़ी अयोध्या के महंत राजू दास, स्वामी प्रकाशानंद, साध्वी प्राची समेत अनेक गणमान्य विभूति इस कार्यक्रम में शामिल हुए। हिंदुत्व के लिए काम कर रही देश भर की प्रतिष्ठित शख्सियतों को भी आमंत्रित किया गया। जिसमें सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके भी शामिल हुए।

हिंदुत्व के रक्षण और उत्थान के लिए अपने जीवन अर्पित कर रहे सुरेश चव्हाणके के संघर्ष और समर्पण का सम्मान करते हुए उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरुस्कार प्रदान किया गया। जिसे तालियों की गड़गड़ाहट और जय श्रीराम के नारों के बीच कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें प्रदान किया। कार्यक्रम में सम्मिलित सभी अतिथियों ने चव्हाणके जी के कार्यो की मुक्त कंठ से सराहना भी की। श्रम विकास सहकारी समिति के चेयरमैन वीरेंद्र तिवारी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठक प्रद्युम्न कुमार, मुस्कान के अध्यक्ष डा. शशिकांत तिवारी व प्रताप सि‍ंह रावत की मौजूदगी मेंं सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।

इस अवसर पर देश भर से पधारे आध्यात्मिक महानुभावों को उद्बोधित करते हुए सुरेश चव्हाणके ने कहा,” मेरा सारा जीवन सनातन धर्म को समर्पित है। विधर्मियों को आँखों में मैं कांटों की तरह की चुभता हूं। जिसके लिए वह लगातार मेरे खिलाफ साजिशें रचते रहते हैं। देश भर में मेरे खिलाफ मुकदमें लिखे जाते हैं। उन्होंने अपने खिलाफ देश भर में करीब 1800 से ज्यादा मामले दर्ज होने का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही मेरे खिलाफ 18 हज़ार मामले क्यों न दर्ज करा दिए जांय मैं हिंदुत्व की रक्षा और उत्थान के अपने काम से कभी भी विमुख नहीं हो सकता।

उन्होंने आगे कहा कि हिन्दू राष्ट्र की स्थापना यह मेरा अभियान है। मैं इसे पूर्ण करके ही दम लूंगा। हिन्दू राष्ट्र का मतलब किसी का गला काटना नहीं बल्कि किसी का गला न कटे यह हमारे हिन्दू राष्ट्र का उद्देश्य है। दुर्भाग्य यह है कि गला काटने वाले ही हमारे खिलाफ गला फाड रहे हैं। चव्हाणके ने यह भी कहा कि हिन्दू राष्ट्र के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए यह भी आवश्यक है कि हिन्दू सशक्त, समर्थ और शिक्षित हो।

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