विवाद के बीच वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी को लेकर कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पांचों महिलाओं ने अदालत से गुहार लगाई कि उन्हें ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर पूजा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनका दावा है कि मस्जिद में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। अदालत ने एक कमेटी बैठाई और मस्जिद के परिसर में वीडियोग्राफी का आदेश दिया था। रिपोर्ट की एक “प्रति” याचिकाकर्ताओं के वकीलों द्वारा साझा की गई थी। यह किसी तटस्थ स्रोत से ज्ञात नहीं है कि क्या उन्हें वास्तव में रिपोर्ट की कोई प्रति प्राप्त हुई है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि रिपोर्ट में उनके बयान का समर्थन किया गया था।

आइये बिंदुओं द्वारा समझते है ज्ञानवापी मस्जिद की रिपोर्ट

1. मस्जिद परिसर में हुई वीडियोग्राफी को लेकर वकीलों द्वारा साझा की गई ‘रिपोर्ट’ के अनुसार, मस्जिद के परिसर में त्रिशूल, कमल के फूल और हिंदू धर्म की कुछ प्राचीन मूर्तियां खुदी हुई हैं। इससे पहले, हिंदुत्व कार्यकर्ताओं ने दावा किया था कि शिवलिंग मस्जिद के अंदर पाया गया था।

2. वकीलों द्वारा सौंपी गयी रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद में बेसमेंट के खंभों पर फूल और कलश के निशान खुदे हुए थे। इस स्तंभ पर ‘प्राचीन हिंदी भाषा के कुछ शब्द’ खुदे हुए हैं। तहखाने की दीवारों पर त्रिशूल के निशान हैं। मस्जिद के पश्चिम की ओर दो बड़े स्तंभ और एक मेहराब देखा गया। वे एक प्राचीन मंदिर का हिस्सा प्रतीत होते हैं।

3. रिपोर्ट की माने तो मस्जिद के तीसरे गुंबद के नीचे एक पत्थर पर कमल का निशान खुदा हुआ है। मस्जिद परिसर में ढाई फुट लंबा ढांचा देखा गया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह एक शिवलिंग है।

ज्ञानवापी मस्जिद की “रिपोर्ट” पर कोई टिप्पणी नहीं की गई। लेकिन कई लोगों ने कहा है कि अदालत के देखने से पहले रिपोर्ट को कैसे सार्वजनिक किया जा सकता है।

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