सच्चे देशभक्त और स्वंत्रतासेनानी हमेशा से विवादों में रहे हैं। विनायक दामोदर सावरकर यानि वीर सावरकर को लेकर जारी विवाद के बीच आज उनकी पुण्यतिथि पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री अमित शाह ने वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर भी ट्वीट किया है। बता दें कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां वीर सावरकर की आलोचना करती रही हैं।

वीर सावरकर ने संघर्ष उस समय किया गया जब आज़ादी के तमाम तथाकथित ठेकेदारों द्वारा खुद के गढ़े जा रहे धर्मनिरपेक्षता के नकली सिद्धांतो की सुनामी थी। इस वीर ने सबसे पहले अंग्रेजो की प्रताड़ना झेली और उसके बाद आज़ादी के इन नकली ठेकेदारों के आक्षेप पर वो हिमालय की तरह अडिग रहे।

विरोधियो की चाहत सिर्फ एक थी कि असल हिदुत्व को सदा सदा के लिए दफन कर दिया जाय पर वो महायोद्धा केवल सावरकर थे जिन्होंने पहले अंग्रेजो से देश के लिए संघर्ष किया और उसके बाद धर्मविरोधियो से। आज संघर्ष के उस महास्तंभ का पावन जन्मदिवस है जिसके बलिदान से ये राष्ट्र गौरवान्वित है।

सन् 1883 में मुंबई में जन्मे सावरकर क्रांतिकारी होने के साथ लेखक, वकील और हिंदुत्व की विचारधारा के समर्थक थे। अंग्रेजों ने उन्हें कालापानी की सजा दी थी। विनायक दामोदर सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को हुआ था। पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में वीर सावरकर को भारत रत्न देने का वादा किया था, जिसको लेकर कांग्रेस ने सवाल भी उठाए थे। कई मौकों पर सावरकर को लेकर विवाद खड़ा होता रहा है। वाजपेयी सरकार वीर सावरकर को भारत रत्न देने की कोशिश कर चुकी है। वर्ष 2000 में वाजपेयी सरकार ने तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन के पास प्रस्ताव भेजा था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था।

आज वीरता की उस अमर गौरवगाथा , राष्ट्र प्रेम और धर्मरक्षक वीर सावरकर जी की पुण्यतिथि पर उनको बारम्बार नमन और वन्दन करते हुए उनकी यशगाथा को अनंत काल तक जन जन को सुनाते रहने का हम सब संकल्प लेते है।

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