सोशल मीडिया पर एक सैनिक की मूर्ति की तस्वीर वायरल हो रही है। जिसमें भारत में 1400 साल पहले कंप्युटर चला रहै सैनिक की मूर्ति बनाई गई थी। इसको भारत में प्राचीन समय में तंत्रज्ञान के विकास का सबूत बताया जा रहा है।

वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि 1400 साल पहले, पल्लव राजा नरसिंह द्वितीय दृारा निर्मित लालगिरी मंदिर में, एक कम्प्यूटर तथा कीबोर्ड के साथ बिजली का तार और ये सब पत्थर की दीवार पर एक सैनिक की मूर्ति भी उकेरी गई है।

जब असली न्यूज़ टीम ने इसे रिवर्स इमेज सर्च किया तो हमें पिंटरेस्ट वेबसाइट पर वायरल तस्वीर मिली। पोस्ट के विवरण में लिखा है, यह मेक्सिको सिटी के कलाकार राउल क्रूज़ की कृतियाँ है, जो की भविष्य की कल्पना करती हैं। यह एज़्टेक और माया सभ्यता के सौंदर्यशास्त्र अभी तक आविष्कार की जाने वाली तकनीकों के साथ मेल खाते हैं।

आगे सर्च करने पर हमें पता चला कि यह तस्वीर कॉसमॉस लैटिनोस एन एस्ट्रोलॉजी ऑफ साइंस फिक्शन फ्रॉम लैटिन अमेरिका एंड स्पेन’ नामक पुस्तक के कवर पेज के रूप में इस्तेमाल किय़ा गया है।

बुक के कवर पेज पर लगी तस्वीर की क्रेडिट किसे दी गई है यह जानने के लिए बुक को गूगल में ढूंढने कोशिश की। कवर पेज के लिए राउल क्रूज़ को क्रेडिट दिया गया है। हमें वायरल तस्वीर राउल क्रूज़.आर्टिस्ट वेबसाइट पर भी मिली। तस्वीर के शीर्षक में ‘मेमोरी ऑफ़ द फ्यूचर’ और राउल क्रूज़ के नामलिखा गया है। राउल क्रूज़ का परिचय एक इलस्ट्रेटर, फाइन आर्टिस्ट, कॉन्सेप्ट आर्टिस्ट के तौर पर दिया गया है।

तथ्यों की जांच के पश्चात हमने पाया कि वायरल तस्वीर कोई प्राचीन मूर्ति नहीं है, बल्कि मेक्सिको सिटी के कलाकार राउल क्रूज़ की एक आर्ट है।

बता दें कि राउल क्रूज़ (a.k.a. Racrufi) 1983 से फ्रीलांस इलस्ट्रेटर के रूप में काम कर रहे हैं। वो मेक्सिको में (फर्नांडीज पब्लिशिंग, रॉबर्टो गौडेली, मॉन्टेज), यूएस (मार्वल कॉमिक्स और पत्रिकाएं हेवी मेटल एंड स्पेक्ट्रम, अन्य के बीच) और अर्जेंटीना (लुमेन पब्लिशिंग) में काम करते हैं।

 

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