एक अखबार की कटिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि आदिवासी राष्ट्रपति होने के बाद भी एमपी में कुछ आदिवासियों के पानी मांगने पर वहां की पुलिस ने उन्हें जबर्दस्ती पेशाब पिला दिया। इस दावे को सच मानते हुए यूजर बीजेपी सरकार पर निशाना साध रहे हैं।

जब इसकी पड़ताल असली न्यूज़ टीम ने की तो पाया वायरल दावा गलत है। दरअसल ये घटना मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में अगस्त 2019 में हुई थी। पुरानी घटना को अभी का बताकर गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

वायरल न्यूजपेपर की कटिंग में लिखा है कि मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में पुलिस द्वारा कथित रूप से पांच आदिवासी युवकों को जबरन पेशाब पिलाए जाने का मामला सामने आया है। घटना जिले के नानपुर पुलिस थाने की बताई जा रही है। मामला सामने आने के बाद थाने के इंचार्ज समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

हमने वायरल पोस्ट की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले अखबार की खबर में इस्तेमाल की गई हेडिंग को कीवर्ड बनाकर गूगल में सर्च करना शुरू किया। कीवर्ड से सर्च करने पर हमें कई जगह संबंधित खबर मिलीं। satyagrah.scroll.in की वेबसाइट पर 13 अगस्त 2019 को प्रकाशित खबर के मुताबिक, आरोपित पुलिसकर्मियों ने हिरासत में रखे गए पांचों आदिवासी युवकों पर पहले हमला बोला और जब पीड़ितों ने उनसे पानी मांगा तो उन्हें पेशाब पीने पर मजबूर किया।

आगे सर्च करते हुए हमें इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर भी वायरल दावे से जुड़ी खबर मिली। 13 अगस्त 2019 को प्रकाशित इस खबर में बताया गया कि “मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के नानपुर थाने के प्रभारी सहित चार पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। आरोप है कि उन्होंने हिरासत में पांच युवा आदिवासी पुरुषों के साथ मारपीट की और पूछने पर उन्हें पेशाब पिलाया।

वायरल दावे को thewirehindi.com की वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है। आपको बता दें की जिस समय यह घटना हुई थी, तब कांग्रेस की सरकार थी और वहां के मुख्यमंत्री कमलनाथ थे।

हमारी पड़ताल में दावा भ्रामक निकला। यह घटना मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में अगस्त 2019 में हुई थी। पुरानी घटना को अभी का बताकर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है। उस समय कांग्रेस की सरकार थी।

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